कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा; राष्ट्रपति को भेजा रिजाइन, SC ने कराई थी जांच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किया
Justice Yashwant Varma resigns after cash case controversy breaking
Justice Yashwant Varma resigns: कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से आखिरकार इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने आज (10 अप्रैल 2026) को राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। वर्मा ने राष्ट्रपति को भेजे पत्र में कहा है, ''मैं उन कारणों की तरफ नहीं जाना चाहता, जिन्होंने मुझे यह पत्र लिखने के लिए मजबूर किया है। अत्यंत दुख के साथ मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज के पद से अपना इस्तीफा तत्काल प्रभाव से दे रहा हूँ। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।''
सुप्रीम कोर्ट ने कराई थी जांच
मार्च 2025 में जस्टिस यशवंत वर्मा के नई दिल्ली स्थित आवास पर आग लगने के बाद स्टोर रूम से भारी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी। जिसके बाद आरोप लगा कि यह भारी कैश भ्रष्टाचार से कमाया हुआ जस्टिस यशवंत वर्मा का ही है। वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनवाई की और तीन सदस्यीय एक पैनल गठित कर इसकी जांच कराई गई। जिसने रिपोर्ट चीफ जस्टिस को सौंपी। पैनल की रिपोर्ट में नकदी मिलने की पुष्टि की गई।जिसके बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट जज के तौर पर 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी।
जस्टिस वर्मा आवास से बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश (नोट) मिलने के विवाद के कारण पूरे देश में बेहद चर्चा में रहे और उनकी काफी बदनामी भी हुई। उनके चलते ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल खड़े हुए। सरकार भी इस ओर सख्त दिखी। वहीं आखिरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की जांच और संसद में अपने खिलाफ महाभियोग चलाये जाने की कार्यवाही के बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि इस इस्तीफे के बाद वर्मा पर आपराधिक मुकदमा चलने और गिरफ्तारी की संभावना है, क्योंकि अब उन्हें वर्तमान जज के रूप में प्राप्त संवैधानिक संरक्षण नहीं मिलेगा।
2021 में दिल्ली हाईकोर्ट के जज नियुक्त हुए
चर्चित जस्टिस यशवंत वर्मा 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश बनाए गए थे। इसके बाद फिर वह स्थायी न्यायाधीश बने। वहीं 2021 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में जज के तौर पर नियुक्त किया गया था। लेकिन आवास पर भारी मात्रा में कैश मिलने के विवाद के बाद उन्हें पहले दिल्ली हाईकोर्ट से वापस इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था। जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर किए जाने का वहां वकीलों ने विरोध भी जताया था और कहा था कि जस्टिस यशवंत वर्मा ने भ्रष्टाचार किया है, वह जज बनकर सुनवाई नहीं कर सकते और न फैसले दे सकते। विरोध के बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को किसी भी सुनवाई से अलग कर दिया गया था।